कोरबा

विद्युत कंपनियों में अब लागू होगा औद्योगिक विवाद अधिनियम

पावर कंपनी ने जारी किया परिपत्र, औद्योगिक संबंध अधिनियम होगा समाप्त

विद्युत कंपनियों में अब लागू होगा औद्योगिक विवाद अधिनियम

0 पावर कंपनी ने जारी किया परिपत्र, औद्योगिक संबंध अधिनियम होगा समाप्त

कोरबा। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज की तीनों विद्युत कंपनियों में अब छत्तीसगढ़ औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 आइडी एक्ट प्रभावशील होगा। इसके पूर्व कंपनी में छत्तीसगढ़ औद्योगिक संबंध अधिनियम 1960 आइआर एक्ट लागू था। राज्य शासन की अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद इसे विद्युत कंपनियों ने लागू कर दिया है।

उक्त संबंध में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी के कार्यालय मुख्य अभियंता (मानव संसाधन) ने परिपत्र जारी किया है। 11 सितंबर को जारी परिपत्र में उल्लेख किया गया है कि छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग द्वारा जारी अधिसूचना छत्तीसगढ़ औद्योगिक संबंध अधिनियम 1960 के उपबंध में वर्णित उद्योगों की अनुसूची में विद्युत उत्पादन, पारेषण और वितरण उद्योग आते हैं, इस अधिनियम के स्थान पर अब 22 मार्च 2024 से औद्योगिक विवादों का निपटारा औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 में दिए गए प्रावधानों के अनुरूप होंगे। पूर्व में श्रम न्यायालय, औद्योगिक न्यायालय में दायर तथा लंबित प्रकरणों में कार्रवाई पूर्ववत औद्योगिक संबंध अधिनियम के अनुसार की जाएगी। यहां बताना होगा कि भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस), विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन, जनता यूनियन समेत कई यूनियन ने आइडी एक्ट लागू करने की मांग भी प्रबंधन से की थी।

मान्यता के लिए यूनियन के मध्य होगा चुनाव
विद्युत कंपनी में अभी तक आइआर एक्ट लागू होने की वजह से प्रबंधन सभी यूनियन से चर्चा करती थी। उसके बाद ही आदेश जारी किया था, पर अब मान्यता प्राप्त यूनियन के ही वार्ता करेगी। आइडी एक्ट के तहत उसी यूनियन को मान्यता मिलेगी, जिसके सदस्य संख्या 60 प्रतिशत से ज्यादा होगी। मान्यता के लिए यूनियन के मध्य चुनाव होगा। जिस यूनियन को कर्मचारियों द्वारा सर्वाधिक मत (वोट) दिया जाएगा, उसी यूनियन को मान्यता मिलेगी। 60 प्रतिशत से ज्यादा मत पाने वाले यूनियन के सदस्य ज्यादा होंगे, उसके बाद क्रमश: घटते क्रम में यूनियन से सदस्य लिए जाएंगे। इससे बैठक के दौरान सबसे बड़ी यूनियन की वर्चस्व रहेगा।

सदस्यों का होगा सत्यापन

श्रमिक संघ प्रतिनिधियों को अब अपनी यूनियन के सदस्यों का सत्यापन कराना होगा। प्रबंधन के समक्ष सदस्यों के नाम दिए जाएंगे। प्रबंधन प्रत्येक सदस्य से पूछेगी कि उक्त यूनियन के सदस्य रहेंगे। सदस्यों के बताए अनुसार ही यूनियन में नाम शामिल किया जा सकेगा। इससे श्रमिक संगठन की सदस्यता भी स्पष्ट होगी। साथ ही सेवारत कर्मियों को ही श्रमिक संघ के पदों पर रखना होगा।

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