भू-अलंकरण (रंगोली) कार्यशाला तीन दिवसीय कार्यशाला का समापन

कोरबा (शिवशंकर जयसवाल ) संस्कार भारती जिला इकाई द्वारा तीन दिवसीय 11,12,13 जून को रंगोली कार्यशाला का आयोजन आत्मानंद पब्लिक स्कूल में किया गया।
संयोजन समिति कटघोरा द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय भू-अलंकरण (रंगोली) कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमती बबीता गर्ग, मुख्य प्रशिक्षीका गंगा कौशिक प्राचार्य
घरी पखना हाई स्कूल एवं अध्यक्षता आयोजन समिति के अध्यक्ष हेमलता सिदार शिक्षिका उपस्थिति रही।

मंचस्थ अतिथियों का स्वागत प्रतिमा केवट द्वारा टीका रोली लगाकर की गई।
कार्यशाला में नगर एवं आसपास के क्षेत्रों से लगभग 30 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए रंगोली कला की पारंपरिक एवं आधुनिक विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त की।
कार्यशाला में मुख्य ट्रेनर के रूप में गंगा कौशिक ने प्रतिभागियों को रंगोली कला की विविध बारीकियों से अवगत कराई। ट्रेनर ने रंगों के संतुलित प्रयोग, रेखांकन की शुद्धता, विषय चयन, पारंपरिक आकृतियों, ज्यामितीय संरचनाओं तथा समकालीन कलात्मक प्रयोगों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।
तीन दिनों तक चले इस प्रशिक्षण शिविर में प्रतिभागियों ने विभिन्न विषयों पर आकर्षक एवं मनोहारी रंगोलियों का निर्माण किया। छोटे-छोटे बच्चों ने कुछ मिनट में अनेक प्रकार की रंगोली बनाकर प्रस्तुत कर दी ।कार्यशाला के दौरान भारतीय सांस्कृतिक प्रतीकों, प्रकृति, नारी शक्ति, राष्ट्रभावना तथा लोकजीवन से संबंधित विषयों पर विशेष अभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह एवं समर्पण के साथ प्रशिक्षण प्राप्त करते हुए अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
समापन समारोह में मुख्य अभ्यागत के रूप में उपस्थित अग्रवाल महिला मंडल कटघोरा की अध्यक्ष बबीता गर्ग ने अपने उद्बोधन में कहा कि रंगोली केवल सजावट का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना एवं सौंदर्यबोध की जीवंत अभिव्यक्ति है। भारतीय जीवन-पद्धति में प्रत्येक मांगलिक अवसर पर रंगोली का विशेष महत्व रहा है, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का कार्य करती है।
नगर संयोजिका हेमलता सिदार ने बताया कि संगठन का उद्देश्य कला को केवल प्रदर्शन तक सीमित न रखकर उसे समाज के संस्कार, संवेदना एवं सांस्कृतिक जागरण से जोड़ना है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर चित्रकला, रंगोली, संगीत, नृत्य, नाट्य एवं अन्य ललित कलाओं से संबंधित प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है।
कार्यक्रम का संचालन उमेश्वरी मेडम एवं आभार प्रतिमा केवट ने की। कार्यशाला के सफल आयोजन में यामिनी दुबे, रीता सिंह, जे.एस. मानसार, पी.एन. योगी, राज यादव, कन्हैया लाल यादव, गोपाल सर तथा रानू का योगदान रहा।




