नगर कटघोरा में पेयजल की समस्या बरकरार 24 हजार के लगभग गंदे पानी पीने को मजबूर सीएमओ को पेयजल का बजट याद नहीं

कटघोरा (शिवशंकर जायसवाल संपादक कांति न्यूज ) नगर पालिका कटघोरा में विगत कई महीनो से गंदे पानी पीने के लिए लोग मजबूर हो गए हैं ।
वार्ड क्रमांक 1 से लेकर 11 तक लगभग 24 हजार के लगभग गंदे पानी पीने के लिए मजबूर हो गए हैं। क्योंकि आमा खोखरा जलाशय से सीधे पानी सप्लाई किया जा रहा है। लोगो ने प्रतिनिधि से चर्चा करते हुए कहा कि पेयजल के नाम लाखों रुपए व्यय किया जा रहा है। पेयजल के शुद्धिकरण के नाम पर फिटकरी का व्यय करना बताया जा रहा है।

जबकि जलाशय से
इंटकवेल से होकर वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से सफलाई करना था। नहीं किया जा रहा है। करोड़ो रुपए व्यय कर केवल ऊंचे पद पर आसीन होकर मलाई खा रहे है, इधर लोग गंदे पानी पीकर हॉस्पिटल का चक्कर लगा रहे है या 1500/ खर्च कर शुद्ध पानी खरीद कर पी रहे है। कटघोरा के नेता,जनप्रतिनिधि गहरी निंद्रा में सो रहे है।
नगर पालिका परिषद के एक नेता ने चर्चा के दौरान बोले कि पिछले साल भी गंदा पानी पी रहे थे,इस साल पी पियो। शासन द्वारा करोड़ो रुपए व्यय करने के बाद भी लोग गंदे पानी पीने को मजबूर हो रहे है।पानी पिये तो बीमार न पिए तो प्यासे,पानी खरीदो तो पैसा व्यय। आखिर जनता क्या करे। कहा जाए जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो कौन क्या कर सकता है। अति का अंत होना निश्चित होता है। जब किसी का पाप का घड़ा भर जाता है एक दिन फूटता भी है।
पी एच ई विभाग भी आमा खोखरा जलाशय में अधूरा इंटकवेल बनाकर नगर पालिका को सौंप दिये। बंदर के हाथ में उस्तरा पकड़ा दिये। नगर पालिका उस्तरा से अपने गला रेत रहा है।
चोर चोर मौसेरे भाई वाली चरितार्थ हो रहा है। पेयजल के नाम पर लाखों बिल पास कर फिटकरी के नाम पर कभी पाइप के ऊपर पाइप बिछाया गया है और बिल पास कर हजम किया गया जा रहा है।
सीएमओ मुद्रिका प्रसाद तिवारी ने चर्चा करते हुए कहा कि पेयजल के नाम पर प्रतिवर्ष कितना व्यय होता है तो बोले कि मेरे को नहीं मालूम । अधिकारी को एक छोटे से बजट याद नहीं रहता। दुखद बात है।
बी एम ओ रश्मि सिंह ने भी चर्चा करते हुए कहा कि प्रतिदिन लगभग 280से 300 लगभग मरीजों का पंजीयन हो रहा है जिसमें 50 प्रतिशत से अधिक बीमारी खान पान से से संबंधित आ रहा है । अर्थात पेट से संबंधित डायरिया,पेट दर्द,पेचिस एवं गले का होना बताया गया। इतने होने के बाद भी नगर की जनता सोये हुए है कब जागेंगे।




