कोरबा

अदाणी ग्रुप कोरबा में लगाएगी 800-800 मेगावाट की दो इकाइयां


कोरबा पावर लिमिटेड संयंत्र की विस्तार इकाइ के लिए पर्यावरणीय जनसुनवाई आज
अल्ट्रा- सुपरक्रिटिकल तकनीक आधारित इन दोनों इकाइयों
एसईसीएल के खदानों से लगा कोयला हसदेव नदी का पानी आएगा संयंत्र
नई इकाइयों से विद्युत उत्पादन होने पर संयंत्र की क्षमता हो जाएगा 3520 मेगावाट

कोरबा । अदाणी ग्रुप के कोरबा पावर लिमिटेड संयंत्र परिसर में 800-800 मेगावाट की दो इकाइ स्थापित करने 27 फरवरी को पर्यावरणीय जनसुनवाई की कार्रवाई पूर्ण की जाएगी। अल्ट्रा- सुपरक्रिटिकल तकनीक आधारित इन दोनों इकाइयों के स्थापना में 16,611 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इन इकाइयों के परिचालन में आने से संयंत्र की कुल उत्पादन क्षमता बढ कर 3520 मेगावाट हो जाएगी। एसईसीएल की खदान से कोयल की आपूर्ति होगी एवं हसदेव नदी का पानी उपयोग किया जाएगा।
कोरबा -चांपा मार्ग में ग्राम पताढ़ी में स्थित लैंको अमरकंटक पावर लिमिटेड के दिवालिया होने पर संयंत्र को अदाणी ग्रुप द्वारा अधिगृहित कर लिया था। इस संयंत्र में 300-300 मेगावाट की दो इकाइयां से बिजली उत्पादन हो रहा है।
जबकि 660-660 मेगावाट की दो इकाइयों का अधूरी थी। अधिगृहण के बाद संयंत्र की अधूरी पड़ी इकाइयों का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। मार्च 2026 तक दोनों इकाइयों के परिचालन में आने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही कंपनी ने दो नई इकाइयों 800-800 मेगावाट (कुल 1600 मेगावाट)के स्थापना की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। शुक्रवार को पर्यावरणीय जनसुनवाई के बाद पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अनुमति मिलते ही संयंत्र निर्माण कार्य आरंभ होगा। हालांकि इसमें छह माह माह का वक्त लगने की उम्मीद है। विस्तार इकाइ के लिए कंपनी ने रिपोर्ट पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को प्रस्तुत की थी।रिपोर्ट में कहा गया है कि करतला तहसील के ग्राम सरगबुंदिया, ढनढनी, खोड्डल, पहंदा, पताढ़ी में स्थित संयंत्र परिसर के अंदर ही इन दोनों इकाइ को स्थापित किया जाएगा। नए इकाइयों के लिए हसदेव नदी से पानी लिया जाएगा। हालांकि वर्तमान में एनओसी प्रक्रियाधीन है। दोनों इकाइ के लिए 32 एमसीएम पानी प्रतिवर्ष लगेगा। जबकि वर्तमान में 54 एमसीएम प्रतिवर्ष पानी लग रहा है। इस तरह संयंत्र को कुल 86 एमसीएम पानी की प्रतिवर्ष जरूरत होगी। कंपनी द्वारा विस्तार इकाइयों को संयंत्र परिसर में स्थापित करने की बात कही जा रही है। रिपोर्ट में कंपनी ने कहा है कि मौजूदा स्थिति में 505.58 हेक्टेयर जमीन है, वहीं ग्रीन बेल़्ट तथा वृक्षारोपण वाली 127.28 हेक्टेयर जमीन है। विस्तार इकाइ के लिए अतिरिक्त जमीन नहीं लगेगी, पर ग्रीन बेल्ट एवं पौधारोपण के नाम पर 31.76 हेक्टेयर जमीन प्रस्तावित बताया है। इस तरह कुल 159.04 हेक्टेयर जमीन हो जाएगी। विस्तार इकाइ के लिए सरगबुंदिया स्थित हाईस्कूल मैदान में पर्यावरणीय जनसुनवाई आयोजित की जाएगी। जनसुनवाई की प्रक्रिया सुबह 11 बजे से शुरू होगी और शाम तक अनवरत चलेगी। क्षेत्रवासियों के विरोध को देखते हुए जिला एवं पुलिस प्रशासन ने अपने स्तर पर तैयारी पूर्ण कर ली है। स्कूल के मैदान में चारों तरफ बेरीकेट्स लगा दिए गए हैं। पुलिस बल भी काफी संख्या में तैनात किया जाएगा। ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति निर्मित न हो सके।
निर्माण काल में लगेंगे 5368 मजदूर
परियोजना के निर्माण के दौरान स्थाई रुप से 230 तथा संविदात्मक रुप से 5368 मेनपावर की आवश्यकता होगी, जबकि इकाइ के चालू होने स्थाई रुप से 270 कामगार ही रखे जाएंगे और दो हजार संविदात्मक कामगार होंगे। वर्तमान परियोजना की लागत 10897 करोड़ रुपये बताया गया है, जबकि विस्तार इकाई में 16611 करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है। इस तरह कुल 27508 करोड़ रुपये इस प्लांट में लगेंगे।
एसईसीएल, सीसीएल व एनसीएल से लेंगे कोयला
विस्तार इकाइ के लिए कंपनी ने साऊथ ईस्टर्न कोलफिल़्डस लिमिटेड (एसईसीएल) की कोरबा, रायगढ़ खदानों के अलावा सीसीएल तथा एनसीएल से कोयला लेने की योजना बनाई है। जिसे ई- नीलामी के माध्यम से लिया जाएगा। दोनों इकाई के लिए 6.5 मिलियन टन (650 लाख टन) कोयला की जरूरत प्रतिवर्ष होगी। संयंत्र की सभी इकाइयों के परिचालन में रहने पर कुल 15.04 मिलियन टन (एमटी) कोयला की खपत होगी। कंपनी का कहना है कि कोयला रेल माध्यम से संयंत्र पहुंचेगा।

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