भक्त नहीं, सेवक बन कर जीवन की डोर सौंप देनी चाहिए प्रभु काे
भक्त नहीं, सेवक बन कर जीवन की डोर सौंप देनी चाहिए प्रभु काे
भक्त नहीं, सेवक बन कर जीवन की डोर सौंप देनी चाहिए प्रभु काे
0 व्यासपीठ पर दीदी मां मंदाकिनी श्रीराम किंकर
कोरबा। हरदीबाजार में लीलागर नदी के तट पर स्थित श्रीराम जानकी मंदिर प्रांगण में शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीराम कथा एवं श्रीराम विवाह,श्रीराम नाम जप एवं लेखन अनुष्ठान कार्यक्रम में कथा व्यास पीठ से दीदी मां मंदाकिनी श्रीराम किंकर ने कथा विस्तार करते हुए बताया कि जब प्रभु श्री राम व लक्ष्मण जंगल में घूमते हुए पहुंचे, तो वानर राज सुग्रीव को गुप्तचरों से सूचना मिली कि दो नौ जवान युवक चेहरे पर तेज, प्रतापी स्वरुप राजकुमार जंगल में घूम रहे हैं। तब उन्होंने हनुमान को बुलाकर उन्हें अपने पास लाने को कहा। हनुमान वानर रुप में श्री राम प्रभु के पास पहुंचे और उन्हें वानर राज सुग्रीव का परिचय देते हुए अपने को भक्त नही दास (सेवक) कहा। जैसे आप अपने राज्य से वन में वैसे ही महराज सुग्रीव भी राज्य से बाहर उस पहाड़ी के ऊपर रहते हैं। प्रभु आप व महराज सुग्रीव में कोई अंतर नहीं है, महराज सुग्रीव ने आप दोनों को लेने भेजा है और आप दोनों को उस पहाड़ी तक पहुंचने में बहुत कठिनाई होगी और आप दोनों चलते चलते थक जाएंगें। इसलिए दोनों मेरे कंधे पर बैठ जाए और जोर से कंधे को पकड़ ले। इससे आप गिरेंगे नहींं। ऐसा हनुमान ने प्रभु श्री राम व लक्ष्मण से कहा कि वीर हनुमान का कहने का तात्पर्य यह है कि प्रभु ये जो मौका मिला है उसे में ऐसे ही नहीं जाने दूंगा। दीदी मां मन्दाकिनी ने कहा कि यदि समाज में लोग पद, प्रतिष्ठा पाकर आगे बढ़ते हैं, तो उन्हें गिराने वाले भी होते हैं ,ऐसे में हमें अपने कर्म, धर्म करते हुए अपनी जीवन की डोर अपने प्रभु के हाथ में सौंप देना चाहिए, फिर कोई चिंता नहीं करनी चाहिए। श्रीराम कथा प्रतिदिन शाम चार से सात बजे तक अनवरत बह रही है। तृतीय दिवस पर कथा श्रवण करने बोधराम कंवर, श्याम बाई कंवर, पुरुषोत्तम कंवर, मीरा कंवर, प्रमीला कंवर, मदनलाल राठौर, रमेश अहिर, चंद्रहास राठौर, रमेश अहिर, प्रभा तंवर, कदम यादव, राय सिंह तंवर, विजय जायसवाल, कन्हैया राठौर, गोपाल यादव, डा अनिल पांडे, प्रो अखिलेष पांडे, अशोक कुमार मिश्रा, प्रो दुबे, रामरतन राठौर, रामनारायण राठौर, सुरेंद्र राठौर, नरेश राठौर, रामकुमार यादव, गजानंद यादव, राजाराम राठौर एवं पं योगेश मिश्रा समेत बड़ी संख्या में बुजुर्ग, महिला-पुरुष, युवा, बच्चे कथा श्रवण करने पहुंच रहे है। कथा समाप्ति पश्चात सभी उपस्थित श्रोताओं ने राम नाम खाली खानों में पेन से राम-राम लिख कर अपनी श्रद्धा श्रीराम के प्रति दीदी मां को भेंट की।



