कोरबा

एमसीएल नीति अनुरुप भू-विस्थापितों को प्रदान की जाए नौकरी

एमसीएल नीति अनुरुप भू-विस्थापितों को प्रदान की जाए नौकरी

0 बातचीत- जेबीसीसीआइ सदस्य नाथूलाल पांडेय
कोरबा : अपने कोरबा प्रवास के दौरान एचएमएस के महामंत्री एवं जेबीसीसीआइ सदस्य नाथूलाल पांडेय ने कहा कि साऊथ ईस्टर्न कोलफिल्ड्स लिमिटे़ड (एसईसीएल) समेत कोल इंडिया की अन्य संबद्ध कंपनियों के अस्पताल में विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी लगातार बनी हुई है। इसे दूर करने के लिए डाक्टरों की भर्ती उम्र सीमा बढ़ा कर 45 तथा सेवानिवृत आयु सीमा 65 वर्ष करने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही कंपनी स्तर पर डाक्टरों की भर्ती करने कहा गया है, ताकि आसानी से डाक्टर उपलब्ध हो सके, पर प्रबंधन इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इससे कर्मियों एवं उनके परिवार को डाक्टर की सुविधा नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय में मामला होने पर डाक्टर की भर्ती 10 वर्ष तक रुक गई थी, पर अब फैसला आ चुका है। इस दौरान कई डाक्टर की उम्र निर्धारित भर्ती सीमा से पार चुकी है, जबकि डाक्टर चयनित हो चुके हैं। प्रबंधन को शिथिलता बरतते हुए उम्र सीमा बढ़ा कर डाक्टरों की भर्ती करना चाहिए, लेकिन नए सिरे से भर्ती की बात कह अधिकारी टालमटोल की नीति अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि ओडिशा के महानदी कोलफिल्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) में पांच डिसमिल जमीन वालों को भी नौकरी प्रदान किया जा रहा है, पर यहां उक्त नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। कोल इंडिया की कंपनियों में अलग- अलग नियम चल रहे हैं। एमसीएल की भांति एसईसीएल भी भू-विस्थापितों को नौकरी प्रदान करे और जमीन लेकर खदान का विस्तार करे। लेकिन अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोल इंडिया को इस भेदभाव नीति को खत्म कर सभी स्थान पर एक सामान नियम लागू किया जाना चाहिए। पांडेय ने कहा कि मेडिकल अनफिट कर्मियों के आश्रितों को नौकरी देना जल्द शुरू नहीं होता है तो आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया जाएगा।

आनलाइन नहीं हुई सीएमपीएफ प्रक्रिया: गोपाल

साऊथ ईस्टर्न कोयला मजदूर कांग्रेस (एसईकेएमसी) के केंद्रीय अध्यक्ष गोपाल नारायण सिंह ने कहा कि लंबे अरसे से कोयला मजदूरों के कोल माइंस प्राविडेंट फंड (सीएमपीएफ) को आनलाइन करने की प्रक्रिया चल रहा है, पर अभी तक इसे पूरा नहीं किया जा सका है। इससे सेवानिवृत कर्मियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आनलाइन नहीं होने की वजह से सीएमपीएफ में गड़बड़ी किए जाने का मामला सामने आ रहा है। प्रबंधन से कहा गया है कि जल्द ही सीएमपीएफ को आनलाइन कराया जाए, ताकि मजदूरों को मालूम चल सके कि उनके खाते में कितनी राशि है और समय- समय पर कितनी राशि जमा हो रही है, या निकल रही है।

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