कल्चुरी कलार (जायसवाल) समाज द्वारा मां महामाया देवी को चुनरी भेंट चुनरी भेट की परंपरा वर्षों पुरानी

कोरबा (शिवशंकर जायसवाल ) नवरात्रि के सप्तमी तिथि को कल्चुरियों की ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी रतनपुर में है है वंशीय *कल्चुरी कलार (जायसवाल) समाज* द्वारा अपनी कुलदेवी *मां महामाया देवी जी* को प्रतिवर्षानुसार चुनरी भेंट कर विधि विधान से पूजा अर्चना किया गया । यह परंपरा विगत कई हजार सालों से चली आ रही है।

एक बार रतनपुर के राजा रत्न देव सिंह को स्वप्न में महामाया देवी के दर्शन हुए और फिर क्या राजा साहब रतनपुर में मंदिर का निर्माण शुरू कर दिए।उसी समय से कल्चुरी वंशज के लोग महामाया देवी में चुनरी भेट करते आ रहे है। देवी जी को चुनरी भेट का समाज, प्रदेश और देश की खुशहाली और समृद्धि की कामना किया गया । इस अवसार पर समाज प्रमुख से डॉ. सुनील जायसवाल, राजेश जायसवाल, शरद जायसवाल, ओम प्रकाश जायसवाल, राजेंद्र प्रसाद जायसवाल, रामजी जायसवाल, संजय जायसवाल, आनंद जायसवाल, नीरज जायसवाल, डॉ. चंद्र कुमार जायसवाल, नरेंद्र जायसवाल, डॉ. सूर्य प्रकाश जायसवाल, प्रवीण जायसवाल, नितिन जायसवाल, यागवेन्द्र डिक्सेना, डॉ. महेंद्र जायसवाल, सनत जायसवाल, रामबिहारी जायसवाल, राम प्रकाश जायसवाल, आशीष जायसवाल, उमेश जायसवाल, महेंद्र जायसवाल, राजेश जायसवाल , संजू जायसवाल, निधि जायसवाल, सुभाषिनी जायसवाल, सरला जायसवाल, अनामिका जायसवाल, विनीता जायसवाल, डॉ. मोनिका जायसवाल, निशा राय जायसवाल, वर्षा जायसवाल, सरिता जायसवाल आदि कल्चुरी कलार (जायसवाल) के वृद्धजन, पुरुष, महिला और बच्चे भारी संख्या में उपस्थित रहें




