कोरबा

विद्युत कंपनी मुख्यालय का नया रायपुर में स्थानांतरण किए जाने का विरोध

श्रमिक संघ बीएमएस व फेडरेशन-01 ने जताई आपत्ति, मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

विद्युत कंपनी मुख्यालय का नया रायपुर में स्थानांतरण किए जाने का विरोध

0 श्रमिक संघ बीएमएस व फेडरेशन-01 ने जताई आपत्ति, मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

कोरबा : राजधानी रायपुर में स्थित विद्युत कंपनी के मुख्यालय को नया रायपुर में स्थानांतरण किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस पर श्रमिक संघ प्रतिनिधियों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि नए मुख्यालय भवन निर्माण के लिए दो सौ करोड़ से भी ज्यादा राशि खर्च किया जा रहा है। यह उपभोक्ताओं पर न केवल अनावश्यक बोझ है, बल्कि गैर जिम्मेदाराना भी है। वर्तमान स्थल पर पांच करोड़ के खर्च में ही सभी कार्यालय संचालित किए जा सकते हैं।

नए राजधानी में विद्युत कंपनी का मुख्यालय स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी, पर कतिपय कारणों से यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। बताया जा रहा है कि वर्तमान में पिछले कुछ दिनों से राज्य विद्युत कंपनियों के मुख्यालय को नवा रायपुर में स्थानांतरित किए जाने बाबत् आनन फानन में कार्रवाई की जा रही है। इसकी जानकारी मिलते ही श्रमिक संघ प्रतिनिधि विरोध में उतरने लगे हैं। भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध छत्तीसगढ़ बिजली कर्मचारी संघ-महासंघ एवं विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन-जीरो वन ने इस पर आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखा है और कार्यालय को वर्तमान स्थल पर ही संचालित करने की मांग की है। फेडरेशन के महामंत्री आरसी चेट्टी व महासंघ के प्रदेश महामंत्री नवरतन बरेठ ने कहा है कि जानकारी अनुसार नए मुख्यालय भवन निर्माण के लिए 200 करोड़ से भी अधिक राशि खर्च की जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान मुख्यालय परिसर विद्युत कंपनियों के स्वयं के आधिपत्य में है एवं यह पूरी तरह से पर्याप्त है। पिछले कुछ वर्षों में परिसर में कुछ कार्यालय भवन बनाए गए हैं, जिनमें से एक का तो अभी तक उद्घाटन भी नहीं हुआ है। अगर कार्यालयों हेतु और भी स्थान की आवश्यकता है तो अलग-अलग भवन बनाए जाने के बजाय बहुमंजिला कार्यालय भवन बनाया जा सकता है। स्थानांतरण से बाहर से आने वाले कार्मिकों, सेवा प्रदाताओं, उपभोक्ताओं व सेवानिवृत्त कार्मिकों के लिए कठिनाई बढ जाएगी। नेताद्वय ने कहा कि विद्युत कंपनियों का प्रस्तावित मुख्यालय स्थानांतरण निश्चित रूप से न केवल सभी के लिए कष्टप्रद है, वरन् शासन की छवि धूमिल होने का अंदेशा है। इसलिए जिम्मेदार अधिकारियों को मुख्यालय स्थानांतरण की सभी गतिविधियों पर रोक लगाने आदेशित किया जाए।

ऊपर के आदेश का तर्क क्या
नेताद्वय ने कहा कि मध्य प्रदेश, गुजरात, आंध्रप्रदेश एवं पंजाब आदि जैसे अन्य राज्यों में भी स्टेट पावर कंपनी का मुख्यालय, राजधानी से बाहर अन्य शहरों में स्थित है। प्रस्तावित मुख्यालय स्थानांतरण का उद्देश्य क्या है, यह समझ से परे है। आश्चर्य की बात है कि इस मुद्दे पर किसी भी अधिकारी के पास कोई उत्तर नहीं है, केवल एक ही जवाब है कि जो कुछ किया जा रहा है वह उपर से आदेश के तहत किया जा रहा है। किसी को नहीं पता कि आखिर ऊपर से आदेश का अर्थ क्या है। वहीं कार्मिको में ही नहीं, वरन् जनता में भी चर्चा है कि स्थानांतरण के बाद वर्तमान कार्यालय भूमि को भू-माफिया को सौंपने का रास्ता ही खुलेगा।

पेंशन फंड मे जमा किया जाए 500 करोड़

फेडरेशन व महासंघ के महामंत्री ने कहा कि अगर बिजली कंपनियों के पास 500 करोड़ रूपये अतिरिक्त उपलब्ध है, तो बेहतर होगा कि या तो यह राशि पेंशन फंड में जमा करा दी जाए अथवा विद्युत कर्मियों को प्रोत्साहन के रूप में वितरित किया जाए। उन्होंने कहा कि विद्युत उपभोक्ताओं के हित में खर्च की जाए, अन्यथा अनावश्यक खर्च न की जाए

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