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समाज को कुछ दे जाता है, उसे दुनिया याद करती है

पिछले कई जन्मों के पुण्य का संग्रह हमें सनातन धर्म में जन्म लेने का अवसर करता है प्रदान

समाज को कुछ दे जाता है, उसे दुनिया याद करती है

कथाव्यास पीठ से प्रेमभूषण महाराज ने श्रीराम कथा में कहा
कोरबा। संसार में लोग आते हैं और जाते हैं लेकिन वही लोग याद किए जाते हैं जो समाज को कुछ दे जाते हैं। सनातन धर्म के ऋषि-मुनियों ने कठोर तप करके समाज के लिए बहुत कुछ दिया है तभी हम उनको आज भी याद करते हैं। भगवान भी जब मनुष्य का शरीर धारण करके धरती पर आए तो उन्होंने तप करके मनुष्य के कल्याण के लिए ही कुछ करने का प्रयास किया, अपने खुद लिए कुछ नहीं किया।
उक्त बातें कोरबा के एस ई सी एल कुसमुंडा क्षेत्र में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीराम कथा के 7 वें दिन कथा की पूर्णाहुति स्तर में पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए कहीं।
श्री रामकथा गायन के माध्यम से भारतीय और पूरी दुनिया के सनातन समाज में अलख जगाने के लिए सुप्रसिद्ध कथावाचक प्रेमभूषण जी महाराज ने कथा प्रसंगों का गायन करने के क्रम में कहा कि अगर जीवन में हमें आत्मिक सुख की प्राप्ति करनी है तो हमें श्री राम कथा का गायन, मनन और श्रवण जरूर करना चाहिए। यह आवश्यक नहीं है कि हम घंटों बैठकर से रामकथा सुने अगर हम मन लगाकर 20 मिनट भी कथा सुनते हैं तो यह हमें आत्मिक सुख की प्राप्ति कराती है।
एक स्वस्थ मनुष्य ही हर प्रकार के कार्यों को करने में सक्षम हो पाता है और इसके लिए उसके शरीर को स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक होता है। ठीक इसी प्रकार हमारी आत्मा को भी स्वस्थ रखने का एक सरल तरीका है सत्संग में जाना और श्रीराम कथा का आश्रय। श्री राम कथा आत्मा को भोजन प्रदान करती है।
पूज्य महाराज श्री ने कहा कि राम जी के विभिन्न विकल्पों में अलग-अलग प्रकार से अवतार हुए हैं और इसी कारण से अलग अलग तरीके से रामायण की रचना भी हुई है जिसने जैसा देखा वैसा लिखा है इसीलिए मानस जी में लिखा गया है कि रामायण सत कोटि अपारा। यही वजह है कि पिछले 31 वर्षों से भी अधिक समय से मैं उसे राम कथा का गायन कर रहा हूं और मुझे यह नित नवीन लगती रही है।

“हम विचार करें कि जीवन में सुख पाने के लिए हमें क्या चाहिए?” इतिहास गवाह है कि संसार के समान से आज तक कोई भी सुखी नहीं हो पाया है। असली सुख जहां है, उसकी तलाश आज का मनुष्य करता भी नहीं है। हमारे सदग्रंथ बताते हैं कि अगर जीवन में सचमुच सुख चाहिए तो हमारे पास दो वस्तुओं की आवश्यकता होती है। प्रथम है निरंतर भक्ति और दूसरा है सत्य का संग। हमारे सनातन सद्ग्रन्थों ने बताया है कि 84 लाख योनियों में विचरण करने के बाद भी कभी प्रभु की कृपा होने से ही मनुष्य का शरीर प्राप्त होता है। अगर मनुष्य का शरीर प्राप्त हुआ है तो आप समझें कि आप सचमुच भाग्यशाली हैं। और अगर इसके साथ आपको सत्संग की प्राप्ति हो गई हो तो आप उससे भी अधिक भाग्यशाली हैं।
हमारे लिए तो यह आवश्यक है कि हम निरंतर सत्संग में रहें और आवश्यकता पड़ने पर ही हमें सांसारिक कार्यों में भी जाना चाहिए। लेकिन साथ ही हमें बार-बार सत्संग में वापसी के लिए भी प्रयास करते रहना चाहिए।
पूज्य महाराज जी ने कहा कि मानस जी सरल ग्रंथ नहीं है। इनकी महिमा का बखान विभिन्न संतो ने बारंबार किया है। श्रीरामचरितमानस तुलसी दल के उस एक पत्ते के समान हैं जिनके बिना भगवान की पूजा अधूरी रह जाती है। ठीक है इसी प्रकार से कोई भी विद्वान कोई भी ग्रंथ पढ़ ले लेकिन अगर उसने मानस जी का पठन-पाठन नहीं किया तो उसकी यात्रा अधूरी रह जाती है।
पूज्य श्री ने कहा कि ग्रंथ का तात्पर्य यह होता है कि वह साहित्य जो हमारे अंदर की ग्रंथियों को खोल दे। जब हम श्रेष्ठतम लक्ष्य के साथ ईमानदारी से प्रयास करते हैं तो ईश्वर भी हमारे कार्य को पूरा करने में सहयोगी बनते हैं। जीवन में कुछ भी पाना है तो हमें चलना तो अवश्य पड़ेगा।
पूज्यश्री ने कहा कि पिछले कई जन्मों के पुण्य का संग्रह हमें सनातन धर्म में जन्म लेने के का अवसर प्रदान करता है । इसे व्यर्थ ही नहीं गंवाना चाहिए और भटकना भी नहीं चाहिए।
पूज्यश्री ने कहा कि भगवान की कथा भागवतों का कल्याण करती है और आसुरी प्रवृत्ति वाले लोगों को मोहित कर देती है। भगत के लिए यह आवश्यक है कि वह निरंतर अन्य लोगों को भी भगवान की चर्चा में लगाने का प्रयास करें। वैसे भगवान की चर्चा सबको अच्छी नहीं लगती है। पूर्व जन्म के अच्छे कर्मों के प्रभाव से ही व्यक्ति भगवान की चर्चा में लग पाता है। समाज में कभी भी अच्छे विचार वाले लोगों की कमी नहीं रही है। बुरे विचार वालों की संख्या हमेशा ही कम रही है। यह ईश्वर की ही व्यवस्था है कि कभी भी बुराई का प्रभाव अच्छाई से अधिक नहीं हो पाता है। समाज में बुरे लोगों का अस्तित्व भी जरूरी है क्योंकि जब वह अच्छे लोगों को त्रस्त करते हैं तभी तो वह भजन की ओर प्रवृत्त हो पाते हैं। एसईसीएल के महा प्रबंधक कुसमुंडा क्षेत्र श्री संजय मिश्रा, दैनिक यजमान सर्वश्री राजीव सिंह, पी रमन्ना और हिरेन कुमार चन्द्रा ने सपरिवार व्यास पीठ का पूजन किया और भगवान की आरती उतारी। हजारों की संख्या में उपस्थित श्रोतागण को महाराज जी के द्वारा गाए गए गीत और भजनों पर झूमते हुए देखा गया। कथा के समापन के अवसर पर भाजपा के जिला अध्यक्ष राजीव सिंह,इंटक के राष्ट्रीय महामंत्री संजय सिंह,इंटक के कंपनी स्टीयरिंग कमिटी के सदस्य गोपाल नारायण सिंह,वरिष्ठ लॉयर अशोक तिवारी,ऑटो सेंटर के संचालक पवन अग्रवाल शामिल हुए।

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