वीर बाल दिवस बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की शहादत का सम्मान – डॉ पटेल
वीर बाल दिवस बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की शहादत का सम्मान – डॉ पटेल

शासकीय मुकुटधर पांडेय महाविद्यालय कटघोरा में वीर बाल दिवस मनाया गया।

कोरबा कटघोरा (शिवशंकर जायसवाल): उच्चशिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार शासकीय मुकुटधर पांडेय महाविद्यालय कटघोरा में संस्था के प्राचार्य डॉ मदन मोहन जोशी के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में वीर बाल दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम अधिकारी राष्ट्रीय सेवा योजना एवं विभागाध्यक्ष हिंदी डॉ शिवदयाल पटेल ने कहा कि वीर बाल दिवस बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की शहादत का सम्मान है। उन्होंने वीर बाल दिवस का इतिहास बताते हुए कहा कि सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गोविंद सिंह के चार बेटे थे, अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह। सन 1705 में पंजाब में मुगल शासकों ने द्वारा गुरु गोविंद सिंह को पकड़ने के लिए पूरी ताकत लगा दी। पकड़ में न आने की जद्दोजहद में गुरु जी का परिवार बिछड़ गया। बेटा अजीत सिंह और जुझार सिंह युद्ध मे शहीद हो गए। और बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह जो मात्र 9 और 7 वर्ष आयु के थे। धोखे से पकड़ लिये गए। नवाब वजीर खां ने दोनों छोटे साहिबजादों पर बहुत अत्याचार किए और धर्म बदलने के लिए दबाव बनाया। उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। तब वजीर खान ने दोनों साहिबजादों को दीवार में जिंदा चुनवा दिया। उस दिन 26 दिसंबर की तारीख थी।उनकी शहादत का सम्मान करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2022 से 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की। प्रो. यशवंत जायसवाल गणित विभाग ने कहा कि वीर बाल दिवस भारतीय इतिहास के गौरवशाली अध्याय को याद करने का एक मौका देता है और आने वाली पीढ़ियों को सच्चाई और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने के लिए मनाया जाता है। प्रेम नारायण वर्मा ग्रंथपाल ने कहा कि आत्मसम्मान और आत्मगौरव के लिए बाहरी शक्ति के सामने सिर झुकाने के बजाय बलिदान का चयन करना अपने संस्कार के प्रति निष्ठा और भक्ति को प्रदर्शित करता है।
प्रो. धर्मेंद्र कुमार, चंचल वैष्णव और कीर्तिकुमार दीवान ने भी अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम को सफल बनाने में वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ पूनम ओझा, नूतन पाल कुर्रे, टी आर आदित्य, डॉ प्रिंस मिश्रा, डॉ डीडी टंडन, शैलेंद्र ओटी, प्रतिमा कंवर, भुनेश्वर कुमार, राकेश आजाद, गंगाराम पटेल, कुमकुम सिंह, मानसी साहू, खुशनुमा परवीन, संजय लहरे, बाला राम साहू, डॉ कल्पना शांडिल्य, मनहरण श्याम, के के मरकाम, विकास जायसवाल, देवेंद्र, लक्ष्मीन बाई, सविता नेताम, कंचन देवी, महिपाल सिंह, अमन पांडेय, अनित यादव, गणित विभाग के छात्र-छात्राएं समीर रात्रे, शिखा गोस्वामी, पूर्णिमा चौहान, उमेश महंत, विवेक कुमार, हिमेश, संदीप गोस्वामी, शिवराज, डिंपल, साक्षी पाठक, वनवासी परमेश्वर, योगेश चौहान, वेदांत जायसवाल, पूजा पटेल, दिलीप कुमार, सुनयना, सुलोचना, आयुष, शैलेन्द्र कुमार, सुदांशु ,पारुल यादव, शीतल यादव, श्वेता, मनीषा, कालज देवांगन, मिली देवांगन, अंजलि, अंजलि सहिस,नीरज तिवारी, तनु तिवारी, अश्विनी सोनी, सुरभि शांडिल्य, पिंकी मरकाम, प्रीति राज, शशिकला, आकांक्षा, शिवांजलि हरवंश, विवेक निर्मलकर, चंद्रप्रकाश, मनोज कंवर, प्रियांशु कंवर, संदीप दास, तुषार भारद्वाज, रोशन कुमार, परमेश्वर दास, कैलाश कुमार, निखिल कुमार, सुलोचना, सुनयना, रोहन गुप्ता, रूपेश दास, आरती जायसवाल, भूमिका, अनामिका, श्वेता कंवर, आरती नायक,अपेक्षा कश्यप, रूपा यादव, कोशमिता गोंड, दिव्यंती पांडे, संजना, तनु रजक, प्रज्ञा लारिया, शालिनी कंवर, सुहाना परवीन, अनुष्का चौधरी, नीलम पटेल, निकिता, खुशबू, आशा सौकी, उनिशा सिदार, रोशनी पैकरा, हीरा पटेल, करिश्मा पटेल, सरस्वती, सविता, पूजा, रुचि जायसवाल, सादिका खान, सुमैया परवीन, रीचा, बबीता, भुनेश्वरी, रिया सिंह, मनीषा कश्यप, माधवी प्रजापति, भारती कंवर, अमीषा कंवर, प्रिया यादव, कुंतिमा महंत, श्रद्धा यादव, हिमालय रावत, प्रेमा, वर्षा केवट, उदित महंत, अमन, चेत्रांश आदि का अथक सहयोग रहा।
