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सिंधी महिला समाज द्वारा तीज पर्व हर्षोल्लास पूर्वक मनाई गई

 

कटघोरा( शिवशंकर जयसवाल )सिंघी समाज द्वारा 31अगस्त को तीज का त्योहार बड़ी धूमधाम एवं हर्षोल्लास पूर्वक मनाई गई।
हिंदू पंचांग के अनुसार
श्रावण मास की पूर्णिमा के तीसरे दिन कृष्ण पक्ष के तुतीया को मनाया जाता है ।

आज के दिन विवाहित सिंधी महिलाओं के लिए यह व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन वे अपने पति की लंबी आयु, अच्छी सेहत, समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए पूरे दिन निर्जला या फलाहारी उपवास रखती हैं।असुर (Assur): व्रत के दिन सुबह सूर्योदय से पहले (लगभग सुबह 4 बजे) महिलाएं उठकर कुछ खाती हैं, जिसे ‘असुर’ कहा जाता है। इसमें अक्सर सिंधी व्यंजन ‘कोकी’ और रबड़ी या कुछ मीठा खाया जाता है। इसके बाद पूरे दिन का कठिन व्रत शुरू होता है।तीजड़ी माता की कथा: शाम को महिलाएं सज-धजकर (झूलेलाल धाम ) जाती हैं पर तीजड़ी माता (गौरी माता) की मिट्टी की मूर्ति बनाकर झूला झुलाती हैं और पारंपरिक पौराणिक कथा सुनती हैं।
रात को जब चांद निकलता है, उसी समय अर्ध दिया जाता है।
कच्चे दूध, उबले चावल, चीनी और कटे हुए खीरे से बने ‘अर्घ्य’ को चंद्रमा को अर्पित किया जाता है। इसके बाद ही महिलाएं जल ग्रहण कर अपना व्रत खोलती हैं।
सिंधी महिला समाज के प्रमुख पदाधिकारियों द्वारा एक स्थान पर एकत्रित होकर प्रमुख त्यौहार मनाती है।जिसमें
तान्या नागवानी, नेहा आलवानी,कसक दुहलानी,कोमल परसवानी, तृप्ति चावला,शालु बहरानी,निशा छावडा महिलाओं की सदस्यों के द्वारा शिव जी एवं पार्वती माता की झाँकी बनाकर प्रस्तुत की गई।
कार्यक्रम के अंत में समाज पदाधिकारियों द्वारा
65साल की सुहागन महिलाओं का सम्मान कि है।
इसमें बहुत सारी प्रतियोगिता आयोजित की गई।जिसमें तीज क्वीन प्रतियोगिता प्रमुख रही।
तीन प्रतियोगीयो का नाम चयन किया गया।


1-मायशा दुहलानी
2-पीहु आलवानी
3-काजल दुहलानी।

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