शोक श्रंद्धाजलि अर्पित

कोरबा (शिवशंकर जायसवाल)
“डॉ.तीजन बाई जी पंडवानी गायिका के साथ ही साथ छत्तीसगढ़ और पूरे देश की मौलिक सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने में एक सांस्कृतिक कलाकार योद्धा भी थीं। विश्व के कई देशों में आपके द्वारा प्रस्तुत कलात्मक पंडवानी गायन व नित्य विधा अतुलनीय कला के रूप में प्रस्तुत हुई है। आपसे मेरा आत्मीय संबंध रहा। जब भी आपसे मैं मिलता आप बोलते – ‘आओ प्रोफेसर प्यारेलाल भाई। कैसे हो। क्या बात है आप शिक्षा जगत में छाये हो।’ तब मैं तपाक से बोलता -‘ अरे नहीं दीदी जी। आप तो पूरी दुनियां में गीत- संगीत के क्षेत्र में छाई हुई हैं। हम कहां और आप कहां।’ नहीं प्यारे भाई सब अपनी अपनी जगह छाए हुए हैं। उनकी यह सादगी और प्यार भरा वाक्य यह सिद्ध करता है कि देश रत्न हमारी दीदी तीजन बाई अत्यंत सरल,सहज और स्वाभिमानी व्यक्तित्वशाली अग्रणी कला सम्राज्ञी थीं। एक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में कुछ प्रोफेसर मेरा परिचय दीदी जी से कराने लगे तब दीदी ने कहा -‘अरे भई ये तो मेरे प्रिय प्यारेलाल भाई हैं। आप लोगों से पहले से मेरा परिचय है।’ उक्त सभी वाकया और घटनाएं मुझे सदैव दीदी जी की याद दिलाती रहेगी। मेरी प्यारी दीदी जी को कौन नहीं जानता। आज मैं अत्यंत दुःखी हूं किंतु गर्व का भी अनुभूति कर रहा हूं कि दीदी जैसी महान् विदुषियों ने देश की ऐतिहासिक परंपरा में एक अमिट विरासत कला के रूप में बना गई हैं। अंत में दीदी जी को सादर नमन करते हुए उन्हें आत्मिक श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं।”




