लोकार्पण हुआ, लेकिन बिजली नहीं पहुँची: डेढ़ साल बाद भी अधूरा पड़ा , 33/11 केवी कसनिया सब स्टेशन, जनता में भारी आक्रोश

कटघोरा (शिवशंकर जायसवाल ) क्षेत्रवासियों को बेहतर और निर्बाध विद्युत आपूर्ति का सपना दिखाकर करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित 33/11 केवी कसनिया विद्युत उपकेंद्र (सब स्टेशन) का लोकार्पण तो तीन माह पहले बड़े समारोह में करा दिया गया, लेकिन आज भी यह परियोजना अधूरी पड़ी हुई है। परिणामस्वरूप वार्ड क्रमांक 14 एवं 15 सहित आसपास के हजारों उपभोक्ताओं को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
कटघोरा नगर पालिका परिषद के वार्ड क्रमांक 15 स्थित पौनी पंसारी के पीछे निर्मित 3.15 एमवीए क्षमता वाले 33/11 केवी सब स्टेशन का लोकार्पण प्रदेश के आबकारी मंत्री मा लखन देवांगन के कर कमलों द्वारा किया गया । लोकार्पण के दौरान इसे क्षेत्र के लिए बड़ी सौगात बताया गया, लेकिन हकीकत यह है कि सब स्टेशन आज भी पूर्ण रूप से संचालित होने की स्थिति में नहीं है।
फीडर तैयार नहीं, करोड़ों की परियोजना अधर में
जानकारी के अनुसार इस सब स्टेशन से तीन अलग-अलग फीडर संचालित किए जाने थे
लखनपुर – बरभांठा फीडर
सुतर्रा – मोहनपुर फीडर
कसनिया – शहर फीडर
इन फीडरों को चालू करने के लिए लगभग 70 पीसीसी पोल, करीब 3.5 किलोमीटर 11 केवी लाइन तथा लगभग आधा किलोमीटर 11 मीटर एच-बीम पोल लगाकर नई विद्युत लाइन तैयार की जानी थी। यह कार्य परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा था, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से ठेकेदार द्वारा आज तक इसे पूरा नहीं किया गया।
सूत्रों के अनुसार लगभग 1 करोड़ 85 लाख रुपये की लागत से बने इस सब स्टेशन में तीनों फीडरों को अलग-अलग करने के लिए लगभग 20 लाख रुपये के कार्य ठेकेदार को करना था, जो अब तक अधूरा पड़ा हुआ है।
समय सीमा खत्म, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
बताया जाता है कि इस परियोजना को लगभग दो से तीन वर्ष पूर्व स्वीकृति मिली थी। लगभग डेढ़ वर्ष पहले भूमि आवंटन भी कर दिया गया था। सामान्यतः ऐसे कार्यों के लिए लगभग नौ माह की समय-सीमा निर्धारित की जाती है, लेकिन समय सीमा समाप्त होने के बाद भी कार्य पूरा नहीं हुआ।
विभाग के ही कुछ लोग दबी जुबान से कहते हैं कि ठेकेदार बहुत रसूखदार है और उच्चाधिकारियों से बहुत मधुर संबंध होने के कारण निचले स्तर के अधिकारी और कर्मचारी ठेकेदार को कुछ कह नहीं सकते जिसके कारण ठेकेदार अपनी मनमानी करता है गुणवत्ताविहिन कार्यों पर भी विभाग आंख बंद किए बैठा रहता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब परियोजना अधूरी थी, फीडर तैयार नहीं थे और विद्युत आपूर्ति शुरू करने की आवश्यक व्यवस्थाएँ भी पूरी नहीं थीं, तब आखिर किस आधार पर इसका लोकार्पण कर दिया गया?
जनता को नहीं मिला लाभ, विभाग पर उठ रहे सवाल
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत एवं लापरवाही के कारण करोड़ों रुपये की यह परियोजना केवल कागजों और लोकार्पण कार्यक्रमों तक सीमित होकर रह गई है। लोगों का कहना है कि विभाग का रवैया ठेकेदार के प्रति अत्यधिक नरम बना हुआ है, जबकि आम जनता की परेशानियों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
बरभांठा और कसनिया के रहवासी सबसे ज्यादा प्रभावित
सब स्टेशन चालू नहीं होने के कारण वार्ड क्रमांक 15 के बरभांठा मोहल्ले को आज भी ग्रामीण क्षेत्र के लखनपुर फीडर से जोड़ा गया है। इसके कारण वहां के उपभोक्ताओं को बार-बार बिजली कटौती, लो-वोल्टेज और तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं वार्ड क्रमांक 14 कसनिया को भी पुराने कटघोरा सब स्टेशन से ही यथावत बिजली आपूर्ति की जा रही है, जिससे यहां के रहवासियों को भी लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जनता पूछ रही है—लोकार्पण किस बात का?
क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि जब तक सभी फीडर पूर्ण रूप से तैयार होकर विद्युत उपकेंद्र से नियमित बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हो जाती, तब तक इस परियोजना का वास्तविक लाभ जनता को नहीं मिलेगा। लोगों ने विभाग एवं शासन से मांग की है कि अधूरे कार्यों को तत्काल पूरा कर सब स्टेशन को पूर्ण क्षमता के साथ संचालित किया जाए तथा कार्य में हुई देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय की जाए।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि करोड़ों रुपये खर्च होने और मंत्री के हाथों लोकार्पण होने के बावजूद आखिर कब तक कसनिया सब स्टेशन केवल नाम का उपकेंद्र बना रहेगा और क्षेत्रवासियों को इसके वास्तविक लाभ के लिए कितनी और प्रतीक्षा करनी पड़ेगी?
मानसून के पूर्व मेंटेनेंस कार्य अधूरा ए. ई. पैकरा
नगर में आए दिन बिजली गुल होने से आम जनता बहुत परेशान हो गया है।मानसून सत्र के पूर्व बिजली विभाग द्वारा किसी प्रकार का कोई मेंटेनेंस कार्य नहीं किया गया।इस विषय में जे ई शहरी विभाग के अधिकारी रणजीत सिंह पैकरा से पूछ गया तो बोला कि मानसून के पूर्व एक मरम्मत करवाया गया है। बिजली बंद होने से आम जनता गाली गलौच करते है इसलिए दूसरी बार मेंटेनेंस नहीं करवाए। मानसून के पूर्व मेंटेनेंस नहीं करवाने से अभी बिजली गुल नहीं हो रहा है क्या, अब तो प्रतिदिन हो रहा है। गर्मी के समय एक दिन बिजली बंद कर मरम्मत किया जाता तो आज ये दिन देखने को नहीं मिलता। बिजली बंद होने से पेयजल सप्लाई पूरी तरह बंद हो जाता है।नगर में लगभग 11 से 12 वार्ड वाले आ मा खोखरा जलाशय से निर्भर है। जो बिजली सप्लाई बंद होते ही पेयजल व्यवस्था पूरी तरह ठप्प हो जाता है। बिजली विभाग के सूत्रों ने जानकारी में बताया कि नगर में लगभग 95 ट्रांसफार्मर लगा हुआ है जिसमें केवल बिजली ऑफिस में ए. बी. स्विच लगा हुआ है। जबकि नगर के सभी वार्ड में ए बी स्विच होनी चाही। तभी जल्द मरम्मत कार्य हो पाएगा । ए बी स्विच नहीं होने से पूरी नगर का बिजली बंद कर बिजली मरम्मत कार्य किया जाता है।
ए बी स्विच का मतलब होता है, ए बी स्विच से बिजली सफलाई कट कर आगे बिजली सुधार कार्य करना । जिसमें आसानी से बिजली कर्मी कार्य कर सकते है।
नगर कटघोरा को बिजली विभाग वाले दो भागों विभाजित किया गया है टाउन वन जिसमें नवागांव, बस स्टैंड,महेशपुर, आधा तहसील भाट्ठा,छीरा एवं टाउन टू में मेन रोड,बस्ती,कारखाना , बाजार मोहल्ला आता है। बिजली बंद होने से टाउन वन या टू का सफलाई बंद कर बनाया जाता जिससे आधा नगर अंधेरा छा जाता है। हमारे कोरबा जिले में बिजली तो पैदा होती है परंतु शहर के किनारे नगर एवं ग्राम अँधेरे में जीने के लिएजबुर हो रहे है। हमारे जिले के बिजली अन्य प्रांत के शहरों को रोशन कर रहे हैं।




