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सरदार पप्पना गौड़ महराज का 316वीं आत्म बलिदान दिवस समारोह संपन्न ….   

 

दिल्ली ( कांति न्यूज से शिवशंकर जायसवाल की रिपोर्ट) 02.04.2026

*जय गौड़ – कलाल समाज तेलंगाना* की राष्ट्रीय टीम द्वारा दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब रफी मार्ग, नई दिल्ली में गौड़ – कलाल समाज के महानायक महाराजा पप्पना के 316वीं आत्म बलिदान दिवस के अवसर पर संगोष्ठी एवं श्रद्धांजलि, पुष्पांजलि का कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस अवसर पर कलाल समाज सिरमौर केंद्रीय मंत्री श्रीपाद येसो नाईक ने दीप प्रज्वलन कर , महानायक को श्रद्धांजलि पुष्पांजलि कर समारोह का शुभारंभ किया ।

 

तत्पश्चात कार्यक्रम के संयोजक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ रामा राव गौड़ जय गौड़ कलाल समाज तेलंगाना ने सभी को मंच पर मंच पर आमंत्रित किया एवं सभी का परिचय कराया फिर सरदार पप्पना गौड़ के बारे में बहुत सारी जानकारी प्रदान किया ।

इसके बाद अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय के महासभा के राष्ट्रीय महासचिव एवं दिल्ली एनसीआर के अध्यक्ष एडवोकेट शैलेंद्र जायसवाल द्वारा माननीय मंत्री जी का शाल और पुष्प कुछ देकर स्वागत किया गया .

मंचासीन सभी अतिथियों का एवं माननीय मंत्री एवं पूर्व सांसद माननीय मधु याशिकी गौड़ , पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ संजय पासवान जी का अभिनंदन मेजबान संस्था द्वारा पटका पहनाकर स्वागत किया गया।

आये सभी बंधुओं एवं सभी अतिथियों द्वारा पुष्पांजलि एवं अपनी श्रद्धांजलि महाराजा पप्पना गौड़ अर्पित की गई ।

इस अवसर पर गौड़ कलाल समाज द्वारा प्रकाशित ‘जय गौड़ नेशनल डायरी’ एवं महाराजा पप्पना गौड़ के ऊपर लिखी गई, एक पुस्तक का विमोचन भी माननीय मंत्री एवं सभी अतिथियों द्वारा किया गया।

*माननीय मंत्री का उद्बोधन*:

 

माननीय मंत्री ने अपने उद्बोधन में महाराजा पप्पना गौड़ के जीवन के बारे में बहुत विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि महाराजा पप्पना गौड़ एक साधारण परिवार में जन्म लेने के बाद भी समाज और देश की रक्षा के लिए मुगलों से लगभग 40 वर्षों तक संघर्ष किया एवं जन-जन के नायक बनने का सफर जिस प्रकार से उन्होंने तय किया, औरंगजेब की सेना के छक्के छुड़ा दिए और दक्षिण के सभी किले इसमें गोल कुंडा का किला को अजेय रखा । उनके पराक्रम और शौर्य की गाथा दक्षिण भारत के प्रत्येक गौड़ कलाल समाज एवं पिछड़े वर्ग समाज के लिए गौरव की बात है , हमें उनके आज के आत्म बलिदान दिवस के अवसर पर यह संकल्प करना सीखना चाहिए, साधारण से और असाधारण बने जननायक महायोद्धा सरदार पप्पना गौड़ महाराज हमारे समाज के गौरव ही नहीं, पूरे देश के गौरव थे, दक्षिण के शिवाजी महाराज के तरह ही हिंदुत्व के रक्षक योद्धा थे । आज यह सीखने की जरूरत है कि हमें किस प्रकार से समाज में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करना है , समाज को संगठित करना है और संगठन और समाज को एक साथ लेकर किस प्रकार से हमें अपने उच्चतम आदर्श को स्थापित करना है । हमें यह सीख कर गए की राष्ट्र और समाज जीवन , किस प्रकार से व्यक्तिगत जीवन से ऊपर जीना चाहिए। मैं उन्हें शत शत नमन करता हूं और अपनी श्रद्धांजलि पुष्पांजलि अर्पित करता हूं।

 

अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा एवं प्रदेश अध्यक्ष जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा दिल्ली एनसीआर के एडवोकेट शैलेंद्र कुमार जायसवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि मुगल सत्ता के विरुद्ध जन क्रांति का बिगुल फूंकने वाले , पिछड़े समाज संगठन करने वाले, छत्रपति शिवाजी महाराज की रणनीति से प्रेरित होकर , सीमित संसाधनों के बावजूद स्थानीय जनता , वंचित वर्गों एवं शोषित समुदाय को संगठित कर , एक प्रभावशाली सैन्य शक्ति का निर्माण करने वाले एवं ऐतिहासिक विजय प्राप्त करने वाले , स्वराज की स्थापना करने वाले, सामाजिक न्याय का व्यापक दृष्टिकोण रखने वाले, ऐसे महानायक महाराजा पप्पना गौड़ का जीवन सबके लिए प्रेरणादायक है । आज उनके 316वें आत्म बलिदान दिवस के अवसर पर देश के ही नहीं , कलचुरी समाज के भी गौरव महानायक महाराजा पप्पना गौड़ को कोटि-कोटि नमन करते हैं।

 

जायसवाल ने आगे कहा कि जिस प्रकार से पूरे देश में कलचुरी समाज के गौरवपूर्ण इतिहास एवं समस्त महानायकों का इतिहास आज भी इतिहास के पन्नों से अदृश्य है, कभी ठीक से पढ़या और दर्शाया ही नहीं गया , उनकी घोर उपेक्षा की गई, उन्हें आज समाज को आगे लाना चाहिए और उनकी जन्मदिवस , पुण्यतिथि के दिवस पर, इस तरह के आयोजन कर , पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण के समाज को एक करने में , इन महापुरुषों की भूमिका को स्थापित कर , जाति- धर्म के आधार पर समाज को जोड़ने के लिए , सभी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को आगे आना चाहिए । आज देश में 15 करोड़ का कलचुरी समाज है, विभिन्न उपवर्गों में बटा हुआ है, हमे उपवर्ग भेदकर को तोड़कर , एक सामूहिक जाति का भाव, कलाल, कलवार और कलार जाति का गौरवपूर्ण इतिहास पुनः लिखने और अपने समाज को बताने की आवश्यकता है।

 

इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों में शिक्षा जगत के प्रसिद्ध समाज सेवी भोपाल से जय नारायण चौकसे , कन्याकुमारी से राजा नाडार, हरियाणा से रमेश अहलूवालिया , त्रिपुरा से अमरदीप जायसवाल , उड़ीसा से पधारे गुरुबक्स सिंह अहलूवालिया, जय किशन कर्णवाल, किशोर भगत, राजीव जायसवाल , उमेश जायसवाल, अनिल कुमार जायसवाल मनोज शाह , सच्चिदानंद जायसवाल, नीरज जायसवाल , कृष्ण कांत जायसवाल गाजियाबाद एवं दक्षिण भारत के कई प्रमुख राजनीतिक जनप्रतिनिधि एवं देश के सभी राज्यों से हजारों की संख्या में गौड़-कलाल, कलार , जायसवाल समाज के लोग उपस्थित रहे ।

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