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जयस्तंभ के देखरेख , संरक्षित एवं सौंदर्यीकरण का अभाव

 

कटघोरा ( सत्यम जायसवाल )15 अगस्त 1947 को आजादी के प्रतीकात्मक जय स्तंभ का निर्माण देश, प्रदेश के हर नगरों और कस्बों में किया गया है। जिससे बरबस आजादी के बाद निर्मित हुई जयस्तंभ को देखने से पुरानी यादें ताजा हो जाती है।

आजादी के 78 वर्ष पूर्ण हो चुके । वहीं 15 अगस्त 1947 को आजादी के प्रतीकात्मक जय स्तंभ का निर्माण देश, प्रदेश के हर नगरों और कस्बों में किया गया है। जिससे बरबस आजादी के बाद निर्मित हुई जयस्तंभ को देखने से पुरानी यादें ताजा हो जाती है। नगर में स्थापित जय स्तंभ नगर के व्यस्ततम चौक जो कि कटघोरा बिलासपुर मेन रोड में स्तिथ है चौक में प्रातः से ही लोगों की आने जाने का निरंतर क्रम जारी रहता है।

क्योकि नगर के हृदय स्थल पर निर्मित जयस्तंभ कटघोरा के मेन मार्केट और रिहायशी क्षेत्र में होने के बाद भी नगर पालिका में कई अध्यक्ष एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी आए और चले गए। लेकिन किसी के द्वारा जयस्तंभ चौक को संरक्षित एवं सौंदर्यीकरण करने का प्रयास नहीं किया गया। यदि जयस्तंभ चौक की सुध लेकर उसके मरम्मत और सौंदर्यीकरण के कार्य को प्राथमिकता के आधार पर कराया जाता तो आज जयस्तंभ अपने वजूद की लड़ाई लड़ते नहीं दिखता।

 

वर्षो से नहीं हुई सौंदर्यीकरण

जयस्तंभ में जो घेरा बनाया गया था वह भी हटा दिया गया है। जयस्तंभ में लोग साप्ताहिक बाजार के दिन रस्सी बांधकर ताल-पत्री बांध देते है वही पर कचरा फेक दिया जाता है। बाजार के दिन गाड़िया टिका दिया जाता है।स्तम्भ पर विज्ञापन के पोस्टर/पाम्पलेट चिपका दिया जाता है गंदगी कर दी जाती है।

जयस्तंभ को स्टील बाउंड्री कर अंदर मार्बल लगाया जाना चाहिए। इसका प्रतिवर्ष आकर्षण को बनाए रखने के लिए रंग रोगन, लाइट,रोजाना स्थल की साफ सफाई करनी चाहिए। जबकि आजादी के प्रतीक जय स्तंभ की हालत बहुत दयनीय हो चुकी है।अन्य स्थानों में बने जय स्तंभ का सुंदरीकरण किया गया है। लेकिन कटघोरा में बना जयस्तंभ वैसे कि वैसा है जो दशकों से किसी भी प्रकार का कोई सौंदर्यीकरण का कार्य नहीं किया गया है।

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