कोरबा

वर्षा एवं भू-विस्थापितों के आंदोलन से एसईसीएल पिछड़ा, 1674.9 लाख टन ही हुआ उत्पादन

वर्षा एवं भू-विस्थापितों के आंदोलन से एसईसीएल पिछड़ा, 1674.9 लाख टन ही हुआ उत्पादन


पिछले वित्तीय वर्ष से 385.1 लाख टन रहा कम
1707.8 लाख टन रहा कोल डिस्पैच

कोरबा : साऊथ ईस्टर्न कोलफिल़्डस लिमिटेड (एसईसीएल) ने निवृतमान वित्तीय वर्ष में 1674.9 लाख टन कोयला उत्पादन किया। यह आंकड़ा बीते वित्तीय वर्ष 2023-24 से भी कम है। बावजूद कंपनी कोल इंडिया में दूसरे स्थान पर रही। भू- विस्थापितों के आंदोलन के साथ ही मेगा परियोजना कुसमुंडा में वर्षा का पानी भरने से कंपनी अपने निर्धारित लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। एसईसीएल में कोल डिस्पैच (प्रेषण) 1707.8 लाख टन रहा।

एसईसीएल को वित्तीय वर्ष 2024-25 में कोेल इंडिया ने 2060 लाख टन कोयला उत्खनन का लक्ष्य दिया था।प्रारंभ में कंपनी की खदानों से बेहतर उत्पादन होते रहा, पर वर्षा शुरू होते ही खदान से असर पड़ा और कोयला निकालने की गति धीमी हुई। सबसे ज्यादा दिक्कत ओपनकास्ट खदानों में हुई। इस बीच मेगा परियोजना कुसमुंडा में पानी भरने से एक इंजीनियर की मौत हो गई और कोयला उत्खनन पूरी तरह ठप हो गया। इससे खदान काफी पीछे पिछड़ गई। वही दीपका व गेवरा मेगा परियोजना भी निर्धारित लक्ष्य के हासिल नहीं पहुंच सकी। मानिकपुर खदान एक माह पहले अपने उत्खनन लक्ष्य को हासिल कर सकी। भूमिगत खदानों में उत्पादन पूरा नहीं हो सका, परिणाम स्वरूप निवृतमान वित्तीय वर्ष में एसईसीएल 385.1 लाख टन पीछे रह गई। कोल इंडिया में कंपनी को एक बार फिर दूसरे स्थान पर रहना पड़ा। पहले स्थान पर महानदी कोलफिल्डस लिमिट़ड (एमसीएल) काबिज है। हालांकि कंपनी ने मिट्टी निकासी ओबीआर में रिकार्ड बनाया है और वित्तीय वर्ष 2024- 25 में ओबीआर 357.10 मिलियन क्यूबिक मीटर रहा। इस ओबीआर की बदौलत कंपनी को नए वित्तीय वर्ष में उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

कोल इंडिया में हुआ 7810.6 लाख टन उत्खनन

एसईसीएल समेत कुछ अन्य कंपनियों के पिछ़डने का असर कोल इंडिया के कुल उत्पादन पर पड़ा। कोल इंडिया को 8380 लाख टन का लक्ष्य दिया गया था, पर 31 मार्च 2025 तक 7810.6 लाख टन ही कोयला उत्खनन हो सका। इसमें महानदी कोल फिल्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) ने 2250 के स्थान पर 2251.7 लाख टन, डब्ल्यूसीएल ने 690 के स्थान पर 691.2 लाख टन तथा एनसीएल ने लक्ष्य अनुरुप 1390 लाख टन उत्खनन किया। जबकि अन्य कंपनी में बीसीसीएल ने 45 के स्थान पर 405, सीसीएल ने 1000 के स्थान पर 875.5, ईसीएल ने 540 के स्थान पर 520.3 लाख एवं एसईसीएल 2060 के स्थान पर 1674.9 टन ही उत्पादन कर सकी। कैप्टिव खदान से 1700 तथा एससीसीएल ने 720 लाख टन होने पर देश में कुल 10,417.4 लाख टन कोयले का उत्खनन हुआ।

– कहां कितना हुआ उत्पादन (वर्ष 2024-25)
क्षेत्र नाम- उत्पादन (लाख टन में)

चिरमिरी- 31.4
बैकुंठपुर- 25.2

कोरबा – 72.6
सोहागपुर- 65.6

हसदेव- 31.00
जमूना-कोतमा- 34.9

कुसमुंडा- 284.3
जोहिला- 18.1

विश्रामपुर- 23.5
रायगढ़- 150.3

गेवरा- 560.3
भटगांव- 42.3

दीपका- 335.3
अब करना होगा 2120 लाख टन उत्खनन

निवृतमान वित्तीय वर्ष का लक्ष्य एसईसीएल ने भले ही पूरा नहीं किया है, पर कंपनी को नए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 60 लाख टन ज्यादा उत्खनन करने का लक्ष्य दिया गया है। कंपनी को अब 2120 लाख टन कोयला निकालना होगा। निवृतमान वित्तीय वर्ष में 2060 लाख टन करना था, पर कंपनी इससे पिछड़ गई। इसमें एसईसीएल की मेगा परियोजना गेवरा, दीपका तथा कुसमुंडा की 1530 लाख टन है।

– किस क्षेत्र में वर्ष 2025-26 में कितना करना होगा उत्पादन
क्षेत्र- उत्पादन (लाख टन में)- मिट्टी निकासी (एमक्यूबिक मीटर)

बैकुंठपु्र- 30.30- 00.00
भटगांव- 52.70- 25.500

विश्रामपुर- 41.60- 8.500
चिरमिरी- 34.50- 4.900

हसदेव- 34.00- 8.500
जमुना- कोतमा- 43.70- 18.000

जोहिला- 20.60- 14.000
सोहागपुर- 70.90- 27.100

कोरबा- 88.70- 15.500
दीपका- 400.00- 40.000

गेवरा- 630.00- 77.000
कुसमुंडा- 500.00- 60.000

रायगढ़- 173.00- 61.000
कुल- 2120.00 -360.000

 

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