13 सौ करोड़ लाभ के बाद भी जर्जर विभागीय आवास का एक से पांच हजार तक बढ़ा दिया किराया
13 सौ करोड़ लाभ के बाद भी जर्जर विभागीय आवास का एक से पांच हजार तक बढ़ा दिया किराया
विद्युत उत्पादन कंपनी, किराया वृद्धि स्थगित नहीं करने पर कर्मी करेंगे आंदोलन

कोरबा : छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी ने अधिकारी- कर्मचारियों के संयुक्त प्रयास से पिछले तीन वित्तीय वर्ष में 1300 करोड़ से अधिक का लाभ अर्जित किया। बावजूद कंपनी ने अपने कर्मियों को राहत देने के बजाए विभागीय जर्जर आवास का किराया एक से पांच हजार रुपये तक बढ़ा दिया। आवासों के रख-रखाव का खर्च बढ़ने का कारण बताकर आवास किराए-लाइसेंस शुल्क में अक्टूबर 2024 से साढ़े तीन गुना बढ़ोत्तरी की है। प्रबंधन ने किराया वृद्धि में जो पूर्ववर्ती राज्य विद्युत मंडल का आदेश 13 अक्टूबर 1978 का उल्लेख किया है उस आदेश में वृद्धि का उल्लेख ही नहीं है। छत्तीसगढ़ विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन- एक ने किराया वृद्धि स्थगित नहीं होने पर आंदोलन का निर्णय लिया है।
विद्युत कंपनी के विभागीय आवास में निवासरत कर्मियों को प्रबंधन ने जोर का झटका धीरे से दिया है। इससे कर्मियों में नाराजगी बढ़ गई है। कंपनी की इस कार्यप्रणाली की निंदा करते हुए छत्तीसगढ़ विद्युत कर्मचारी संघ-फेडरेशन-एक के महासचिव आरसी चेट्टी ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बिजली उत्पादन में कीर्तिमान स्थापित करने वाली विद्युत उत्पादन कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2021-22 में 294 करोड़, 2022-23 में 309 करोड़ एवं 2023-24 में 710 करोड़ रूपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया। लाभ में चल रही कंपनी के कर्मियों को इस लाभ से वार्षिक बोनस वृद्धि, मासिक इन्सेटिव बोनस, ओव्हर टाईम आदि के भुगतान की अपेक्षा थी, परन्तु अफसोस की बात है कि प्रबंधन को करोड़ो रुपये संयंत्रो के नवीनीकरण पर खर्च करना आवश्यक लग रहा है, वहीं कर्मियों के 50-60 वर्ष पुराने जर्जर आवास गृहों का नवीनीकरण करना उचित नहीं लग रहा है। उन्होंने कहा कि कंपनी द्वारा पुराने आवासों का नवीनीकरण व सुविधाओं में वृद्धि नहीं करते हुए किराये में वृद्धि करना अनुचित है। महासचिव कहा कि
18 प्रतिशत देना होगा जीएसटी
महासचिव चेट्टी ने कहा कि शासकीय- कंपनी कर्मियों से मूलभूत नियम 45-ए एवं 45-बी के अंतर्गत आवासों का किराया लाइसेंस शुल्क का प्रविधान है। कंपनी ने किराये में साढ़े तीन गुना वृद्धि के साथ इस पर जीएसटी (18 प्रतिशत) का भी उल्लेख किया है। जबकि जीएसटी का नियम निजी मकान मालिक एवं किराएदार पर लागू होता है। कंपनी प्रबंधन आवासों का स्वामी नहीं है और न ही कर्मचारी किराएदार है। आवास की सुविधा कंपनी ने संयंत्र के व्यवस्थित संचालन की दृष्टि से कर्मियों को आबंटित किया है।
एक नजर में आवास का निर्माण वर्ष, भूमि मूल्य व लागत
क्रमांक- आवास प्रकार- निर्माण वर्ष- भूमि का मूल्य रुपये में- निर्माण लागत रुपये में
01- एनए टाइप-1962- 278498- 58429-
02- एनबी टाइप- 1962- 140610- 35140
03- ओए टाइप- 1957- 311817- 46292
04- ओबी टाइप- 1957- 11644- 35538
05- ओसी टाइप- 1957- 297090 -17565
06- एनसी टाइप- 1964 – 91919- 27194
07- ओडी टाइप- 1957- 20253- 15732
08- ओई टाइप- 1957- 13951- 7477
09- एनई टाइप- 1965- 63382- 16775
10- एसई टाइप- 1984- 31745- 26783
11- एसएफ टाइप- 1984- 23865- 19010
12- एनएफ टाइप- 1965- 16375- 10579

