विद्युत कंपनी मुख्यालय स्थानांतरित किए जाने पर छत्तीसगढ़ विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन ने जताई आपत्ति
विद्युत कंपनी मुख्यालय स्थानांतरित किए जाने पर छत्तीसगढ़ विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन ने जताई आपत्ति

सीएम को लिखा पत्र कहा- मुख्यालय स्थानांतरित किए जाने पर जनता पर पड़ेगा 500 करोड़ का बोझ
कोरबा। छत्तीसगढ़ विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन-एक के महासचिव आरसी चेट्टी ने कहा कि विद्युत कंपनी मुख्यालय नया रायपुर स्थानांतरित किए जाने पर जनता पर 500 करोड़ का बोझ पड़ने की संभावना जताई जा रही है। इस पर आपत्ति करते हुए छत्तीसगढ़ विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन-एक ने कहा है कि प्रबंधन का यह निर्णय राज्य, कंपनी, आम उपभोक्ताओं एवं कर्मचारी हित में नही है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को लिखे पत्र में फेडरेशन के महासचिव चेट्टी ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी के डंगनिया स्थित मुख्यालय को स्थानांतरित किए जाने बाबत् स्थापित परंपराओं एवं प्रक्रियाओं को दरकिनार किया जा रहा है। नया रायपुर में मुख्यालय भवन के लिए जारी निविदा में लागत लगभग 200 करोड़ बताया जा रहा है, लेकिन वास्तविक खर्च 500 करोड़ से ज्यादा होगा। इस अनावश्यक निर्णय का भार प्रदेश की आम जनता पर पड़ेगा। वर्तमान मुख्यालय परिसर तक पहुंचना कर्मियों, सेवा प्रदाता, उपभोक्ताओं तथा सेवानिवृत्त कर्मियों सभी के लिए सुविधाजनक है। नया रायपुर में मुख्यालय जाने के बाद आने जाने के लिए अलग व्यवस्था करनी होगी, इसमें समय और साधन दोनों व्यर्थ होंगे। मुख्यालय स्थानांतरण विद्युत अधिनियम के विपरीत विद्युत अधिनियम 2003 मूलतः विद्युत क्षेत्र को शासन से परे एवं स्वतंत्र नियामक के अंतर्गत लाने के उद्देश्य से लाया गया था। चूंकि नियामक आयोग रायपुर में ही स्थित है, इस दृष्टिकोण से कंपनी मुख्यालय को वर्तमान परिसर में ही रखा जाना उचित होगा। देश में कहीं भी विद्युत मंडल- कंपनी का मुख्यालय मंत्रालय परिक्षेत्र में नहीं है। इस संबंध में महत्वपूर्ण यह है कि पूरे भारतवर्ष में किसी भी प्रदेश में विद्युत मंडल का मुख्यालय मंत्रालय परिक्षेत्र में नहीं है। कई राज्य में तो दूसरे शहरों में है। अंत में उन्होंने कहा कि मुख्यालय स्थानांतरण बाबत् चल रही सभी गतिविधियों पर रोक लगाने का आदेश जारी करने कृपा करेंगे।
4500 करोड़ के घाटे में है विद्युत वितरण कंपनी
उन्होंने कहा कि वर्तमान परिसर में पर्याप्त उपलब्धता विद्युत कंपनी के डंगनिया स्थित परिसर में पर्याप्त उपलब्धता है, एवं भविष्य में बहुमंजिला भवन का निर्माण संभव है। इसके साथ ही अनावश्यक वित्तीय बोझ वर्तमान में उत्पादन कंपनी एवं पारेषण कंपनी के लाभ को समायोजित करने के बाद विद्युत वितरण कंपनी 4500 करोड़ से अधिक के घाटे में है। इसकी प्रतिपूर्ति टैरिफ वृद्धि से प्रस्तावित है। ऐसी स्थिति में नए भवन पर खर्च करना उचित प्रतीत नहीं होता है।

