कोरबा

एचटीपीपी में ओजोन परत संरक्षण दिवस के हुए कार्यक्रम

एचटीपीपी में ओजोन परत संरक्षण दिवस के हुए कार्यक्रम

कोरबा । हसदेव ताप विद्युत गृह, कोरबा पश्चिम में राष्ट्रीय हिंदी दिवस/सप्ताह एवं ओजोन परत संरक्षण दिवस के कार्यक्रमों का विधिवत् समापन संयंत्र के ओआरटी कक्ष क्रमांक 02 में सम्पन्न हुआ। इसमें संयंत्र के कारखाना प्रबंधक सह अतिरिक्त मुख्य अभियंता पीके स्वेन द्वारा ओजोन परत को गैसों की एक नाजुक ढाल के रूप में निरूपित करते हुए बताया गया कि यह परत पृथ्वी को सूर्य के हानिकारक पराबैंगनी विकिरणों से बचाती हैं, इस प्रकार यह पृथ्वी पर जीवन, मानव स्वास्थ्य तथा पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने में मदद करती हैं । जिसके उपरांत संयंत्र के वरिष्ठ रसायनज्ञ सुनील रंजन साहू द्वारा ओजोन परत को क्षय से बचाने के लिए फ्लोरीन, क्लोरीन, ब्रोमीन या आयोडीन युक्त हेलोकार्बन के उत्सर्जन को न्यूनतम स्तर पर लाने के उपायों पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसी अनुक्रम में हिंदी दिवस के महत्व एवं इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वेन ने कहा कि 14 सितंबर 1949 को हमारी संविधान सभा द्वारा हिंदी को देश की आधिकारिक भाषा के रूप में अंगीकृत किया गया, जिसके चलते प्रतिवर्ष इस दिन को राष्ट्रीय हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता हैं। आज के समय में हिंदी भाषा के बढ़ते महत्व का अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में दुनियाभर में अंग्रेजी एवं मंदारिन भाषा के बाद हिंदी विश्व की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हैं तथा विश्व भर में लगभग 60 करोड़ लोग इस भाषा का इस्तेमाल अपनी बोलचाल की भाषा के रूप में करते हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से न केवल हिंदी भाषा के प्रति सम्मान एवं जागरूकता बढ़ती है बल्कि कर्मचारियों एवं समुदाय में भाषा के प्रति समर्पण भी मजबूत होता हैं ।
हिंदी पखवाड़े के उपलक्ष्य में एचटीपीपी में हिंदी के प्रयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संक्षेपिका लेखन, कविता एवं नारा लेखन जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन कर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया, जिसके प्रति संयंत्र-कर्मियों में विशेष उत्साह एवं आकर्षण देखने को मिला। इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य अभियंता एमके गुप्ता, सुधीर कुमार पंड्या एवं वरिष्ठ मुख्य रसायनज्ञ एके कुरनाल समेत बड़ी संख्या में संयंत्र के अधिकारी- कर्मचारियों ने उपस्थिति रही।

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