26 वर्ष बाद भी पेंशन में नहीं हुआ संशोधन, कोयला कर्मियों को उठाना पड़ रहा नुकसान
26 वर्ष बाद भी पेंशन में नहीं हुआ संशोधन, कोयला कर्मियों को उठाना पड़ रहा नुकसान
26 वर्ष बाद भी पेंशन में नहीं हुआ संशोधन, कोयला कर्मियों को उठाना पड़ रहा नुकसान
कोरबा। केंद्र की भाजपा सरकार अपने कार्यकाल समाप्ति के अंतिम माह में अधिसूचना जारी कर कोयला खान पेंशन स्कीम, 1998 का संशोधन करते हुए कोयला खान पेंशन (संशोधन) स्कीम 2024 लाकर मिनिमम पेंशन 250 रूपए को बढ़ाकर एक हजार रूपये करने को कहा है। इसमें वर्तमान कोयला मंत्री ने भी अपने बयान में यह घोषणा की है। इस संबंध मे प्रदेश एटक के कार्यवाहक अध्यक्ष दीपेश मिश्रा ने बताया कि कोयला मंत्री ने लोकसभा चुनाव को प्रभावित करने के लिए यह बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1998 जब संयुक्त मोर्चे की सरकार, तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंद्र कुमार गुजराल ने अपने कार्यकाल के अंतिम माह में 20 मार्च 1998 को अधिसूचना जारी कर कोयला उद्योग में कोल माइंस पेंशन स्कीम को 31 मार्च 1998 से लागू किया। उस तारीख को कोयला उद्योग में सरकारी एवं गैरसरकारी कुल मिलाकर 7,82,578 कामगार, कोयला खान भविष्य निधि (सीएमपीएफ) के सदस्य थे, जो देश के विभिन्न कोयला खानों में कार्यरत थे। उन्होंने बताया कि 1998 में जब कोयला खान पेंशन योजना बनी, उस समय मिनिमम पेंशन 250 रुपए रखी गई थी यानी आज के समय में 250 रूपये की कीमत लगभग 1170 रूपये है क्योंकि 1998 से आज तक मुद्रास्फीति (इन्फ्लेशन) दर 6.02 प्रतिशत रही है। इसका मतलब है कि कोयला मंत्री को कम से कम मिनिमम पेंशन 1170 रूपये का घोषणा करना चाहिए था, जो नहीं किया। उन्होंने बताया की कोयला खान पेंशन योजना 1998 में यह भी लिखा है कि हर तीन साल में पेंशन अमाउंट को संशोधित (रिवाइज) किया जाएगा, परंतु अभी तक 26 वर्ष बीत गए, इस दौरान आठ बार पेंशन रकम रिवाइज होना था पर सीएमपीएफओ (बोर्ड का ट्रस्टी) ने इस पर कुछ नहीं किया। इससे लाखों सेवानिवृत्त कोयला कामगारों को काफी नुकसान हुआ। मिश्रा ने कहा कि सीएमपीएफओ ने कोयला खान भविष्य निधि का पैसा भी शेयर बाजार में लगाया जो की पूरी तरह से डूब गया है जबकि ये जगजाहिर है की शेयर बाजार में पैसा लगाना भारी जोखिम का काम है परंतु श्रम संगठनों की चेतावनी के बावजूद भी सीएमपीएफ बोर्ड आफ ट्रस्टी ने डीएचएलएफ कंपनी में करोड़ों रुपए का शेयर खरीदने का काम किया है जो पूरी तरह डूब गया है। इसकी भरपाई भविष्य में कर पाना असंभव है। उन्होंने कहा कि कोयला कर्मियों को पहले वेतन बहुत कम मिलता था, इससे पेंशन रकम बहुत कम फिक्स हुआ। साथ ही योजना में अभी तक संशोधन नहीं हुआ। इसकी वजह से पेंशन रकम बहुत कम मिल रहा, जो ठीक नहीं है। इसमें हर हाल में सुधार करने के लिए कोयला प्रबंधन और भारत सरकार को हरसंभव प्रयास करना चाहिए।
