तीर्थ से अर्थ प्राप्ति और अर्थ से जीवन में सफलता मिलती है
तीर्थ से अर्थ प्राप्ति और अर्थ से जीवन में सफलता मिलती है

कोरबा : श्रीमद् देवी भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस पंडित राजकुमार शर्मा ने तीर्थ यात्रा के महत्व पर विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि तीर्थ यात्रा जीवन में सबको करना चाहिए क्योंकि तीर्थ यात्रा करने से मन-आत्मा की शुद्धि के साथ ही अर्थ की प्राप्ति होती है और जीवन यात्रा में अर्थ (धन) के बिना किसी भी कार्य को निर्विध्न संपन्न नहीं किया जा सकता। जीवन में दान की महत्ता पर पं शर्मा ने कहा कि कर्ण नाम इसलिए युगों युगों तक लिया जाता है क्योंकि दान को उन्होंने नया आयाम दिया। जो दान करने में कंजूसी करता है विपत्ति उसके जीवन में नित नए रूपों में प्रकट होती है। दान करना चाहिए क्योंकि यह अपने साथ विपत्तियों को लेकर जाता है। शर्मा ने कहा कि जो महाभारत में नहीं है वो विश्व में कहीं भी नहीं है। श्रीहरि नारायण की महिमा का गुणगान करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म की स्थापना, सज्जनों की रक्षा और दुष्टों को दंड देने के लिए कृष्ण वासुदेव के रूप में उन्होंने अवतार लिया था। कृष्ण अर्जुन और उसके भाइयों के लिए न्याय के लिए संघर्ष में पथ-प्रदर्शक थे, ताकि एक नई विश्व व्यवस्था की स्थापना की जा सके, जिसमें समाज निर्भय होकर इच्छा और कर्म से धर्म के मार्ग पर चल सके। गीताचार्य थे जिन्होंने गीता का अमृत न केवल अर्जुन को बल्कि उन सभी को दिया जो निष्क्रियता और अवसाद में खो जाते हैं। आचार्य पंडित श्री राजकुमार शर्मा ने के मुखारविंद से तृतीय दिवस में जीवन की अनेक सांसारिक बातों पर भक्तों को ज्ञान दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित भक्तजनों भागवत कथा में सहभागी बनकर अमृत कथा का श्रवण किया। व्यासपीठ पर कथा वाचक शर्मा ने सुखदेव जी के जन्म का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि कैसे श्री कृष्ण सुखदेव महाराज को धरती पर भेजे भागवत कथा ज्ञान करने को ताकि कलयुग के लोगों का कल्याण हो सके। शर्मा ने कहा कि भागवत कथा का श्रवण जीवन को सरल बनाता है।

