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धर्म और सत्य की पुन: स्थापना के लिए श्रीकृष्ण ने लिया अवतार

श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन

धर्म और सत्य की पुन: स्थापना के लिए श्रीकृष्ण ने लिया अवतार

कटघोरा (शिवशंकर जायसवाल)। श्रीमद्भागवत कथा में कथाव्यास शुकदेव आचार्य ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन पूजा के प्रसंग विस्तार से सुनाया। मुख्य यजमान विकास जायसवाल दंपति ने कथा के प्रारंभ में दीप प्रज्वलित किया। कथा में गोवर्धन पर्वत की कृत्रिम आकृति झांकी के माध्यम से दर्शाई गई। भगवान कृष्ण को 56 भोग लगाए गए। प्रवचनों में शुकदेव आचार्य ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने पृथ्वी पर धर्म और सत्य की पुन: स्थापना के लिए द्वापर युग में अवतार लिया। उन्होंने बाल्य अवस्था में ही कालीय नाग का मर्दन करके यमुना को पवित्र किया। पूतना एवं बकासुर आदि मायावी शक्तियों का अंत किया। बृज भूमि में आतंक के पर्याय कंस मामा का वध करके अपने माता-पिता देवकी- वासुदेव और नाना महाराज उग्रसेन को कारागार से मुक्त कराया। गोवर्धन पूजा में प्रकृति की पूजा का उल्लेख किया गया। गायकों द्वारा सुनाए गए भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। भागवत आरती में आचार्य नवीन महराज व काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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